WWE : क्या मैच पहले से फिक्स होता है,क्या हारने वाले को मिलते हैं ज्यादा पैसे

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जैसा कि आप सभी जानते हैं WWE में रेसलिंग के दौरान खतरनाक दांव पेच लगाए जाते हैं। जिससे कि दर्शकों में अनेक प्रकार के सवाल उनके दिमाग में घूमते हैं। जैसे कि क्या रेफरी को पता होता है कि मैच कौन जीतेगा? क्या जो चोट लगती है वह असली होती है? लड़ाई के दौरान जो खून निकलता है क्या वह सच में निकलता है? क्या हरने वाले को ज्यादा पैसे मिलते हैं? ऐसे बहुत से सवालों के जवाब जानने के लिए आगे पढ़ते रहिए।

क्या फिक्स होती है WWE की रेसलिंग?
रेसलिंग की कहानी भी फिल्मों की तरह पहले से ही फिक्स होती है। रेसलर को पता होता है कि कौन जीतने वाला है और कौन हारने वाला है। 99% रेसलिंग पहले से ही फिक्स होती है, जिसमें रैफरी जानता है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा।

WWE के हथियारों की सच्चाई
अगर आपने कभी WWE रेसलिंग देखी हो तो उसमें आपने देखा होगा कि रेसलर्स अनेक प्रकार के हथियारों का प्रयोग करते हैं, जैसे कि टेबल, कुर्सी, हथौड़ा या कोई मोटा डंडा। फाइटिंग के दौरान रेसलर एक दूसरे को मारने के लिए इन हथियारों का प्रयोग करते हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि यह हथियार जितने मजबूत आपको दिखते हैं उतने होते नहीं हैं। हथियार रिंग के आसपास रखे जाते हैं या फिर रिंग के नीचे। इन सभी हथियारों की ट्रेनिंग रेसलर को पहले से ही दी जाती है, ताकि उन्हें ज्यादा चोट का सामना ना करना पड़े।

क्या हरने वाले को मिलते ही ज्यादा पैसे?
अगर आपके मन में ऐसा कोई सवाल है तो उसका जवाब है ना। जी हां ऐसा कुछ नहीं होता कि जो हारेगा उसे पैसे ज्यादा मिलेंगे। यह सब रेसलर के फेस वैल्यू के ऊपर डिपेंड करता है। काफी बार ऐसा होता है हारने वाले रेसलर को ज्यादा पैसे मिलते हैं क्योंकि उसकी फेस वैल्यू जितने वाले रेसलर से ज्यादा है।

क्या है खून की सच्चाई?
पूरा मैच फिक्स होने के बाद भी कई बार ऐसा होता है की रेसलर को चोट लग जाती है। यह चोट रेसलर के चेहरे पर या शरीर पर लगती है जिससे कि जो खून निकलता है वह असली होता है। लेकिन मुंह से निकलने वाले खून के लिए रेसलर ब्लड कैप्सूल का प्रयोग करते हैं, जोकि स्क्रिप्ट के अनुसार उन्हें पहले से बताया जाता है कि उन्हें उसे कब काम में लेना है।

रिंग का फर्श कैसा होता है?
फर्श को बनाने में रबड़ की मैट काम में ली जाती है और इसके नीचे स्प्रिंग्स लगाई जाती है जिससे कि उसके ऊपर गिरने से रेसलर को चोट ना आए। ये स्प्रिंग वहीं होती है जो कि सोफे में काम ली जाती है।